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घर का खाना भी बन सकता है फूड पॉइजनिंग का कारण, जानिए बचाव के आसान तरीके

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फूड पॉइजनिंग केवल सड़क किनारे मिलने वाले खाने से नहीं होती, घर में तैयार भोजन भी लापरवाही के कारण दूषित हो सकता है। जानिए कारण, लक्षण और बचाव के उपाय।

पटना/आलम की खबर:गर्मी और बरसात के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। इस दौरान उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी परेशानियों के मामले ज्यादा सामने आते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इन समस्याओं का एक बड़ा कारण फूड पॉइजनिंग हो सकता है। आम धारणा है कि खराब खाना केवल बाहर खाने से ही होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। घर में बना भोजन भी अगर सही तरीके से तैयार, सुरक्षित और संरक्षित नहीं किया जाए तो वह भी बीमारी का कारण बन सकता है।

फूड पॉइजनिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब व्यक्ति ऐसा भोजन या पानी ग्रहण कर लेता है जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके द्वारा बनाए गए जहरीले तत्व मौजूद होते हैं। दूषित भोजन शरीर में पहुंचने के बाद पाचन तंत्र को प्रभावित करता है और कई तरह के लक्षण पैदा कर सकता है।

गर्मी और नमी वाले मौसम में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि इस समय भोजन को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खुले में रखे खाद्य पदार्थ, लंबे समय तक बाहर रखा हुआ खाना और साफ-सफाई में कमी संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं।

घर का खाना भी क्यों हो सकता है खतरनाक?

कई लोग मानते हैं कि घर का खाना हमेशा सुरक्षित होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खाना बनाने से लेकर उसे रखने तक की प्रक्रिया में थोड़ी सी लापरवाही भी समस्या पैदा कर सकती है।

अगर खाना बनाने से पहले हाथों की अच्छी तरह सफाई नहीं की गई, कच्चे और पके हुए भोजन के लिए एक ही बर्तन या चाकू का इस्तेमाल किया गया, भोजन को सही तापमान पर नहीं रखा गया या पकाने के बाद कई घंटों तक बाहर छोड़ दिया गया तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं।

कई घरों में बचा हुआ खाना अगले दिन दोबारा गर्म करके खाया जाता है। यह आदत तभी सुरक्षित है जब भोजन को सही तरीके से फ्रिज में रखा गया हो। लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा खाना दोबारा गर्म करने के बाद भी कई बार बीमारी का कारण बन सकता है।

फूड पॉइजनिंग के मुख्य कारण

फूड पॉइजनिंग के पीछे कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस जिम्मेदार हो सकते हैं। दूषित पानी, अधपका भोजन, खराब गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री और साफ-सफाई की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

साल्मोनेला नामक बैक्टीरिया अक्सर कच्चे या अधपके अंडे और मांस से जुड़ा होता है। ई. कोलाई दूषित पानी और अधपके भोजन के माध्यम से शरीर में पहुंच सकता है। कैम्पिलोबैक्टर संक्रमण भी दूषित पानी और कच्चे पोल्ट्री उत्पादों से फैल सकता है। वहीं लिस्टेरिया बैक्टीरिया बिना पाश्चुरीकृत दूध और उससे बने उत्पादों में पाया जा सकता है।

इसके अलावा नोरोवायरस जैसे वायरस भी भोजन के माध्यम से संक्रमण फैला सकते हैं। दूषित भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर कई दिनों के अंदर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

फूड पॉइजनिंग के लक्षण पहचानना जरूरी

फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर कई संकेत देने लगता है। शुरुआत में व्यक्ति को मतली, उल्टी, पेट में दर्द और दस्त की समस्या हो सकती है। इसके अलावा पेट में मरोड़, बुखार, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

कुछ लोगों को सिरदर्द और शरीर दर्द की शिकायत भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में मल में खून आना, लगातार उल्टी होना या तेज बुखार जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में फूड पॉइजनिंग ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। लगातार उल्टी-दस्त होने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है।

ऐसे करें फूड पॉइजनिंग से बचाव

फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि भोजन तैयार करने और खाने की प्रक्रिया में स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। खाना बनाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए।

कच्चे मांस, सब्जियों और पके हुए भोजन को अलग-अलग रखना चाहिए। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए और गर्म मौसम में खाने को ज्यादा समय तक बाहर नहीं छोड़ना चाहिए।

पीने के पानी की शुद्धता का भी ध्यान रखना जरूरी है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में।

बचा हुआ खाना अगर रखना हो तो उसे जल्द से जल्द उचित तापमान पर सुरक्षित रखना चाहिए। खाने से पहले उसकी गंध और स्थिति जरूर जांच लें। अगर भोजन खराब लगे तो उसे खाने से बचना चाहिए।

फूड पॉइजनिंग होने पर क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई देते हैं तो सबसे पहले शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। ज्यादा मात्रा में पानी पीना और ओआरएस का सेवन करना मददगार हो सकता है।

मरीज को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए। तला-भुना और मसालेदार भोजन कुछ समय के लिए evitar करना चाहिए।

हालांकि अगर उल्टी और दस्त लगातार हो रहे हों, तेज बुखार हो, शरीर में कमजोरी ज्यादा महसूस हो या डिहाइड्रेशन के संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पॉइजनिंग से बचाव का सबसे आसान तरीका सावधानी और स्वच्छता है। घर का खाना तभी सुरक्षित है जब उसे साफ तरीके से बनाया जाए और सही तरीके से रखा जाए।

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फूड पॉइजनिंग को अक्सर लोग केवल बाहर के खाने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि घर में बनी चीजें भी लापरवाही के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती हैं। भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसे बनाने, रखने और परोसने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

गर्मी और बरसात के मौसम में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इस समय भोजन को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। थोड़ी सी लापरवाही परिवार के कई लोगों को बीमार कर सकती है।

साफ हाथ, स्वच्छ पानी, सही तरीके से रखा भोजन और अच्छी तरह पका हुआ खाना फूड पॉइजनिंग से बचने के सबसे आसान उपाय हैं। लोगों को जागरूक होकर अपनी खान-पान की आदतों में सुधार करना चाहिए।

स्वास्थ्य केवल इलाज से नहीं बल्कि सावधानी से भी सुरक्षित रहता है।

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